विशाखापत्तनम के अपार्टमेंट्स में 20 किलोलीटर के प्राइवेट वाटर टैंकर ₹5,000 से ₹7,000 में बिक रहे हैं क्योंकि म्युनिसिपल सप्लाई पूरी तरह सूख गई है।

विशाखापत्तनम का जल संकट अब म्युनिसिपल कमी से आगे बढ़कर एक प्राइवेट-मार्केट इमरजेंसी बन गया है। अपार्टमेंट और हाई-राइज में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं क्योंकि ग्रेटर विशाखापत्तनम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (GVMC) की सप्लाई घट रही है और परिवार टैंकरों की ओर रुख कर रहे हैं जो खुद पानी नहीं ढूंढ पा रहे हैं।
प्राइवेट ऑपरेटर 20 किलोलीटर के टैंकर के लिए ₹5,000 से ₹7,000 तक चार्ज कर रहे हैं। फिलिंग स्टेशन खाली हो गए हैं। यह कीमत कोई व्हाट्सएप ग्रुप पर फैली अफवाह नहीं है; यह 3 सितंबर की पब्लिक फाइलिंग से तय किया गया रेट है। हफ्ते में कई बार पानी की जरूरत वाले मल्टी-स्टोरी सोसाइटी के लिए यह गणित बहुत भारी है: हर ट्रिप पर हजारों रुपये नकद या यूपीआई में चुकाने पड़ते हैं, और इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि जब ओवरहेड टैंक खाली होगा तब अगली सप्लाई उपलब्ध होगी।
यह कमी अब पुलिसिंग की लड़ाई भी बन गई है। टैंकर ऑपरेटर ट्रैफिक पुलिस की चालानों और राजस्व विभाग द्वारा टैंकरों व फिलिंग पॉइंट्स को जब्त करने की कार्रवाई से संघर्ष कर रहे हैं। अधिकारी फिलिंग पॉइंट्स पर रोक लगाने का कारण भूजल स्तर में कमी को बताते हैं। ऑपरेटरों का कहना है कि सप्लाई के बिना सख्ती बरतने से निवासी बेसहारा रह जाते हैं। यह डेस्क दोनों दावों को सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार दर्ज करता है और ऐसा कोई लीटर-दर-लीटर भूजल स्तर नहीं गढ़ता जो रिकॉर्ड में नहीं है।
नाडु थोटा में गुरुवार को हुए एक जानलेवा हादसे ने टैंकर रूट को कमी की कहानी के साथ-साथ सुरक्षा की कहानी भी बना दिया है। एक महिला की मौत पानी के टैंकर के पहियों के नीचे कुचले जाने से हुई। पुलिस ने इस दुर्घटना को इस बात के उदाहरण के रूप में पेश किया कि जब मांग बढ़ती है और हर उपलब्ध टैंकर को सेवा में लगाया जाता है, तो शहर की सड़कों पर भारी पानी के ट्रैफिक से कितना जोखिम होता है। संक्षिप्त जानकारी से परे पीड़िता का नाम यहां नहीं गढ़ा गया है; लेकिन मौत की सच्चाई दर्ज है।
जीवीएमसी के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (जल आपूर्ति) जी.वी. पल्लम राजू ने कहा कि नागरिक निकाय निजी ऑपरेटरों को नियंत्रित कर रहा है, आयुक्त सख्त रुख अपना रहे हैं, और जनता कॉर्पोरेशन से संपर्क कर सकती है। पानी के बिना नियंत्रण से किचन का ड्रम नहीं भरता। सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर का आश्वासन रिकॉर्ड पर है; खाली फिलिंग स्टेशन भी रिकॉर्ड पर हैं।
जो बातें रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं, वे हैं पूरे शहर के लिए राशनिंग का टाइमटेबल, टैंकर लाइसेंस की संख्या, या वह तारीख जब म्युनिसिपल सप्लाई फिर से शुरू होगी। पाठकों को 20 KL के लिए ₹5,000–₹7,000 का रेट, खाली फिलिंग पॉइंट्स, टैंकरों के खिलाफ राजस्व और ट्रैफिक कार्रवाई, नाडु थोटा की मौत, और SE के नियंत्रण के दावे को स्थापित तथ्य मानना चाहिए। बाकी सब कुछ — कितनी सोसायटियां सूख गई हैं, किस वार्ड में कितने दिनों का स्टोरेज बचा है — रिकॉर्ड में नहीं है और यहां नहीं गढ़ा गया है।
विशाखापत्तनम की तटीय पहचान इसे मानसून की विफलता या भूजल तनाव से नहीं बचाती। जब म्युनिसिपल नल कम पानी देते हैं, तो प्राइवेट टैंकर शहर की अनौपचारिक यूटिलिटी बन जाता है। यह यूटिलिटी अब महंगी है, पुलिस कार्रवाई से विवादित है, और नाडु थोटा के बाद, कम से कम एक सड़क पर जानलेवा हो गई है। इस जांच का मुख्य कारण कोई एक भ्रष्ट अधिकारी नहीं है; बल्कि यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें कमी, कीमत, पुलिसिंग और सड़क का जोखिम एक साथ आते हैं।
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