ACB ने साइबरआबाद के चंदानगर थाना के SI और कांस्टेबल को ₹75,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। SI के ऑफिस की दराज से बरामद हुई नकदी ने मामले को सच कर दिया।

शनिवार को साइबरआबाद थाना में चला ACB का ट्रैप ऑपरेशन सफल रहा। एजेंसी का कहना है कि रिश्वत की रकम SI के ऑफिस की मेज की दराज में पहले से रखी थी।
22 अगस्त 2026 को तेलंगाना एंटी-करप्शन ब्यूरो के अधिकारियों ने साइबरआबाद पुलिस कमिश्नरेट के चंदानगर थाना के सब-इंस्पेक्टर बंदेला बलराज और कांस्टेबल बी. राघवेंद्र (PC-7491) को गिरफ्तार किया। आरोप है कि दोनों ने केस नंबर 696/2026 में शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला दिलाने के लिए रिश्वत मांगी और ली। ACB के अनुसार, जांच और चार्जशीट दाखिल करने में मदद करना वह 'फायदा' था जिसके लिए रिश्वत दी गई। ACB ने स्पष्ट किया है कि ये आरोप हैं, अदालत का फैसला नहीं।
ACB ने बताया कि SI बंदेला बलराज ने ₹75,000 की रिश्वत की मांग की थी। 22 अगस्त को अधिकारियों ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। उसके कहने पर SI के ऑफिस की मेज की दराज से ₹75,000 बरामद किए गए। ACB ने स्पष्ट किया कि यह ट्रैप रिकवरी है, सजा की रकम नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, SI को पहले ही नकद ₹20,000 मिल चुके थे। वहीं, कांस्टेबल को एजेंसी के मुताबिक UPI के जरिए ₹10,000 मिले थे। ये ₹20,000 नकद और ₹10,000 UPI पहले से ली गई कथित रिश्वत का हिस्सा हैं। ACB ने इन्हें अलग से तीसरी किस्त नहीं माना है।
दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार कर हैदराबाद की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। उन्हें SPE और ACB मामलों के प्रिंसिपल स्पेशल जज के सामने पेश कर न्यायिक हिरासत (ज्यूडिशियल रिमांड) पर भेजा गया। ACB ने बताया कि जांच अभी जारी है। शिकायतकर्ता का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।
चंदानगर थाना साइबरआबाद कमिश्नरेट के तहत आता है और यह घटना रंगारेड्डी जिले में हुई है। केस नंबर 696/2026 इस मामले का मुख्य आधार है। ACB ने शिकायतकर्ता की मूल शिकायत या चार्जशीट की कॉपी को सार्वजनिक नहीं किया है।
अभी तक इस मामले में कोई सजा नहीं हुई है। शिकायतकर्ता का नाम और मूल अपराध की जानकारी सार्वजनिक नहीं है। ACB के ट्रैप में SI और कांस्टेबल पकड़े गए, मेज की दराज से ₹75,000 मिले, और पहले से ली गई ₹30,000 की बात सामने आई है। अब मामला हैदराबाद की विशेष अदालत में है।
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