Praja Hakku

PRAJA HAKKU

The Journalism of Outrage

राजनीति

आंध्र प्रदेश टीचर्स फेडरेशन (APTF) ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के आश्वासन के बाद स्पेशल TET मांग के लिए चल रहे अपने अनिश्चितकालीन धरने को अस्थायी रूप से रोक दिया है।

आंध्र प्रदेश टीचर्स फेडरेशन (APTF) ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के आश्वासन के बाद स्पेशल TET मांग के लिए चल रहे अपने अनिश्चितकालीन धरने को अस्थायी रूप से रोक दिया है।

आंध्र प्रदेश टीचर्स फेडरेशन (APTF) ने रविवार, 6 सितंबर 2026 को स्पेशल TET को लेकर चल रहे अपने अनिश्चितकालीन धरने को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। यह कदम मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के इस आश्वासन के बाद उठाया गया कि इन-सर्विस शिक्षकों की चिंताओं की जांच की जाएगी और उन्हें किसी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। APJAC अध्यक्ष ए. विद्या सागर ने प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री के इस आश्वासन के बारे में बताया। उन्होंने यह भी बताया कि शनिवार को कर्मचारी-संघ यूनियनों के साथ हुई बातचीत के बाद दो लंबित महंगाई भत्ते, 12वें वेतन संशोधन आयोग (12th Pay Revision Commission) के लिए एक अध्यक्ष की नियुक्ति और अन्य सेवा संबंधी मुद्दों पर सहमति बनी है। शनिवार का यह पैकेज और रविवार का TET पर रोक इस सप्ताह के श्रम-कैलेंडर का हिस्सा हैं।

APTF की राज्य अध्यक्ष चेन्नुपति मंजुला, महासचिव के. बसवलिंगा राजू और पूर्व महासचिव पी. पांडुरंगा वरप्रसाद राव ने सरकार से APTF के संशोधनों को शामिल करने और NCTE से मंजूरी हासिल करने का आग्रह किया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि शिक्षा समवर्ती सूची (Concurrent List) में आती है और केंद्र के लिए विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करने की मांग की। फेडरेशन ने कहा कि वह सतर्क रहेगा और यह धरना केवल अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। यह मामला पहले के APUTF के भूख हड़ताल खत्म होने वाले मामले से अलग है — इसमें फेडरेशन का नाम अलग है और तारीख भी अलग है। दोनों फेडरेशनों को मिलाने से यह भ्रम पैदा होगा कि किसने क्या रोका और किसके आश्वासन पर।

इस मामले में मुख्य रूप से मुख्यमंत्री नायडू का आश्वासन महत्वपूर्ण है, जिसके बाद यह अस्थायी रोक लगाई गई है। राजनीतिक डेस्क को स्पेशल TET का कोई अंतिम गजट या NCTE का कोई ऐसा पत्र नंबर नहीं गढ़ना चाहिए जो अभी तय नहीं हुआ है। स्पेशल TET फाइल पर नजर रखने वाले इन-सर्विस शिक्षक यह जानना चाहते हैं कि क्या लिखित आदेश मुख्यमंत्री के मौखिक आश्वासन के अनुरूप होंगे; अस्थायी धरना रोकना भविष्य के लिए रखा गया एक दबाव है, न कि समवर्ती सूची और NCTE की मांगों को छोड़ना। तय तथ्य यह हैं कि धरना अस्थायी रूप से रोका गया है, मुख्यमंत्री का आश्वासन विद्या सागर के जरिए आया है, शनिवार को DA और PRC अध्यक्ष की नियुक्ति जैसे नतीजे सामने आए हैं, और APTF के नेतृत्व ने सतर्कता बरतने की चेतावनी दी है।

आंध्र प्रदेश में शिक्षक फेडरेशनों ने सचिवालय के कामकाज में समवर्ती सूची और NCTE से जुड़े मुद्दों को शामिल कराने के लिए धरनों का सहारा लिया है। अस्थायी रोक का मतलब मांगें वापस लेना नहीं है। पाठकों को इस आश्वासन को तब तक एक राजनीतिक प्रतिबद्धता मानना चाहिए जब तक कि लिखित आदेश नहीं आ जाते, और उन्हें इस तरह के किसी भी मनगढ़ंत दावे को खारिज करना चाहिए कि इन-सर्विस शिक्षकों की हर समस्या हल हो चुकी है। रविवार की यह रोक विजयवाड़ा में ही हुई है। APTF के नामित पदाधिकारियों की जानकारी रखें; अस्थायी रोक के अलावा हड़ताल की कोई भी मनगढ़ंत तारीख न बनाएं।

विजयवाड़ा में रविवार की इस रोक के ठीक बाद शनिवार को कर्मचारी-संघों को दो लंबित महंगाई भत्ते और 12वें PRC अध्यक्ष की नियुक्ति जैसी सफलताएं मिली हैं, लेकिन इन दोनों को एक ही आदेश में नहीं मिलाना चाहिए। APTF के नामित नेतृत्व की अभी भी यही मांग है कि संशोधनों को लिखित रूप में शामिल किया जाए और NCTE से मंजूरी ली जाए, साथ ही समवर्ती सूची को लेकर केंद्र के लिए विधानसभा में एक प्रस्ताव लाया जाए। मुख्यमंत्री नायडू का आश्वासन इस पूरे मामले का मुख्य आधार है। जब तक स्पेशल TET के लिए लिखित निर्देश नहीं आते, तब तक धरना केवल अस्थायी रूप से रोका गया है, और पाठकों को फेडरेशन के सतर्क रवैये को ही उसकी वर्तमान स्थिति मानना चाहिए।