Praja Hakku

PRAJA HAKKU

The Journalism of Outrage

चुनाव

आंध्र प्रदेश सरकार ने नगर निगमों और नगर पालिकाओं में मेयर और अध्यक्षों के सीधे चुनाव के लिए नए नियम जारी किए हैं। अब वार्ड सदस्य भी सीधे चुने जाएंगे, जिससे अप्रत्यक्ष चुनाव की पुरानी व्यवस्था खत्म हो जाएगी।

आंध्र प्रदेश सरकार ने नगर निगमों और नगर पालिकाओं में मेयर और अध्यक्षों के सीधे चुनाव के लिए नए नियम जारी किए हैं। अब वार्ड सदस्य भी सीधे चुने जाएंगे, जिससे अप्रत्यक्ष चुनाव की पुरानी व्यवस्था खत्म हो जाएगी।

आंध्र प्रदेश सरकार ने 5 सितंबर 2026 को शहरी स्थानीय निकायों के आम चुनावों के लिए वैधानिक नियम और आदेश जारी किए, जिससे मेयर और अध्यक्षों तथा वार्ड सदस्यों के सीधे चुनाव का मार्ग प्रशस्त हुआ। संशोधित नगरपालिका कानूनों के तहत, नगर निगमों के मेयर और नगर पालिकाओं तथा नगर पंचायतों के अध्यक्षों का चुनाव सीधे उन मतदाताओं द्वारा किया जाएगा जिनके नाम संबंधित मतदाता सूची में शामिल हैं। यह व्यवस्था पहले की उस प्रणाली की जगह लेगी जिसमें निर्वाचित सदस्यों और योग्य पद-अधिकारी सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव होता था।

चुने गए मेयर या अध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा और वे पद का कार्यभार संभालने के आधार पर निगम या नगरपालिका के सदस्य बन जाएंगे। नियमों में चुनाव तंत्र की पूरी प्रक्रिया निर्धारित की गई है: अधिसूचना, नामांकन, जांच और वापसी, प्रत्याशियों की सूची, चुनाव चिह्न का आवंटन, मतदान एजेंट, डाक मतपत्र, मतपत्र या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), NOTA, चुनौती दिए गए और टेन्डर किए गए वोट, मतगणना और पुनर्गणना, परिणामों की घोषणा, और चुनाव खर्च के खातों का जमा करना।

अलग नियमों में प्रत्येक नगर निगम में एक डिप्टी मेयर और प्रत्येक नगर पालिका या नगर पंचायत में एक उपाध्यक्ष के चुनाव को शामिल किया गया है, जो पहले की दो ऐसी पदों की व्यवस्था को बदल देता है। वे पद अभी भी योग्य निर्वाचित और पद-अधिकारी सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से भरे जाएंगे। डिप्टी मेयर के चुनाव के लिए निगम की पहली बैठक के 15 दिनों के भीतर एक विशेष बैठक आयोजित की जानी चाहिए, जिसमें उपाध्यक्षों के लिए समानांतर कोरम, नामांकन, पार्टी-प्राधिकरण, हाथ उठाकर मत और व्हिप (whip) के प्रावधान हों।

आरक्षण के मोर्चे पर, 8 सितंबर से 59 शहरी स्थानीय निकायों में एससी, एसटी, ओबीसी और महिला मतदाताओं की पहचान के लिए 14 दिवसीय अभियान शुरू हो रहा है, जिसमें विजयनगरम नगर निगम और 58 नगर पालिकाएं और नगर पंचायतें शामिल हैं। अंतिम श्रेणीवार मतदाता सूची 21 सितंबर तक तैयार होने की उम्मीद है। परिसीमन पर हाल ही के उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद, 41 शहरी स्थानीय निकायों में मतदाता सूची तैयार करने का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू कर दिया गया है और इसके एक सप्ताह के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। लंबित अदालती कार्यवाही के तहत आने वाले 23 शहरी स्थानीय निकायों में आगे की कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद की जाएगी।

नगर प्रशासन मंत्री पोंगुरु नारायण ने अधिकारियों को समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया। प्रमुख सचिव एस. सुरेश कुमार ने कहा कि विभाग जिला और नगरपालिका अधिकारियों तथा राज्य चुनाव आयोग के साथ समन्वय कर रहा है। सीधे चुनाव से अध्यक्ष पद के लिए प्रचार का स्वरूप बदल जाता है — मतदाता, न कि केवल पार्षद — लेकिन यह अपने आप में परिसीमन और सूचियों पर अभी भी लंबित हर अदालती फाइल को साफ नहीं करता है। यह रिपोर्ट 5 सितंबर को जारी किए गए नियमों और सितंबर के आरक्षण कैलेंडर को दर्ज करती है; यह किसी अधिसूचित फॉर्म बी की तारीख या पूर्ण राज्यव्यापी चुनाव कार्यक्रम का निर्माण नहीं करती है।

चुनाव डेस्क के लिए, 5 सितंबर नियम का दिन है, मतदान का नहीं। मेयर और अध्यक्षों के सीधे चुनाव से चुनाव प्रचार का गणित बदल जाता है: वार्ड रोल पर मौजूद हर मतदाता शहरी निकाय के प्रमुख को चुन सकता है, जबकि डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष एक आंतरिक, अप्रत्यक्ष मुकाबला बने रहते हैं। 59 शहरी स्थानीय निकायों में 8-21 सितंबर का आरक्षण पहचान खिड़की अगला परिचालन चेकपॉइंट है; 41-यूएलबी प्राथमिकता और 23-यूएलबी अदालत बास्केट कानूनी घर्षण बने हुए हैं। मंत्री पोंगुरु नारायण के समय-सीमा निर्देश और प्रमुख सचिव एस. सुरेश कुमार के समन्वय वाले बयान को बनाए रखें। राज्य चुनाव आयोग की ऐसी किसी अधिसूचना तिथि का आविष्कार न करें जो अभी तय नहीं हुई है।