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विकास

आंध्र में 52.7% बारिश की कमी, 61% ही खरीफ बुवाई। किसान सूखा पैकेज की मांग कर रहे हैं, पर कोई सरकारी आदेश नहीं।

आंध्र में 52.7% बारिश की कमी, 61% ही खरीफ बुवाई। किसान सूखा पैकेज की मांग कर रहे हैं, पर कोई सरकारी आदेश नहीं।

बारिश 52.7 प्रतिशत कम हुई है। खरीफ बुवाई सामान्य के मुकाबले 61 प्रतिशत पर है। सूखा पैकेज की मांग है, पर कोई सरकारी आदेश नहीं।

सोमवार, 24 अगस्त 2026 को विजयवाड़ा से कृषि विभाग के आंकड़ों ने बताया कि आंध्र प्रदेश में 52.7 प्रतिशत बारिश की कमी है और खरीफ खेती सामान्य लक्ष्य से बहुत पीछे है। किसान तत्काल विशेष सूखा राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं। मांग तो है, पर इस फाइलिंग पर कोई सरकारी आदेश नहीं है। यह डेस्क कोई आदेश नहीं बना रहा है।

आंकड़ों के मुताबिक खेती का क्षेत्र ₹18.9 लाख हेक्टेयर है जबकि सामान्य खरीफ लक्ष्य ₹30.84 लाख हेक्टेयर यानी 61 प्रतिशत है। उसी कार्ड पर राष्ट्रीय औसत 95.67 प्रतिशत बताया गया है। तेलंगाना का आंकड़ा 88 प्रतिशत है। ये तीनों प्रतिशत कृषि विभाग के आंकड़े के तौर पर हैं, डेस्क द्वारा मंडलवार किया गया कोई नया हिसाब नहीं।

सामान्य के मुकाबले फसल कवरेज: धान 62 प्रतिशत (राष्ट्रीय 98.32, तेलंगाना 74); दलहन 70 प्रतिशत (राष्ट्रीय 91.9, तेलंगाना 117); कपास 75 प्रतिशत (86.4, 102); मक्का 61 प्रतिशत (110.82, 94); मूंगफली 34 प्रतिशत (राष्ट्रीय 104), जिसे सबसे ज्यादा प्रभावित बताया गया है। मूंगफली का 34 प्रतिशत होना इस कार्ड पर सबसे बड़ी फसल लाइन है।

इसी फाइलिंग पर भारत मौसम विज्ञान विभाग का आकलन बताता है कि राष्ट्रीय बारिश की कमी 13 प्रतिशत है। आंध्र प्रदेश की 52.7 प्रतिशत कमी को एक बड़े राज्य के लिए सबसे ज्यादा बताया गया है, जिसमें कर्नाटक 30 प्रतिशत, बिहार 40 प्रतिशत और पंजाब 28 प्रतिशत पर है।

ए.पी. कृषि मिशन के पूर्व उपाध्यक्ष एम.वी.एस. नागिरेड्डी ने कहा कि खेती की लागत बढ़ी है और आमदनी कम हुई है, और गोदावरी और पेन्ना डेल्टा क्षेत्रों को छोड़कर पूरा खेती क्षेत्र तनाव में है। उन्होंने अनंतपुर, श्री सत्य साई, कर्नूल, नंदायाल, वाई.एस.आर. कडप्पा और पलनाडु में मूंगफली, दलहन, कपास, मक्का और बाजरा को सबसे ज्यादा प्रभावित बताया। कर्नूल लिखा गया है। नंदायाल नंदायाल जिला है, कर्नूल जिले का हिस्सा नहीं। ये वर्तनी वैसी ही रहेंगी।

कृष्णा डेल्टा पर उन्होंने बताया कि करीब ₹1.21 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जो सामान्य का 74 प्रतिशत है, जिसमें धान ₹1.19 लाख हेक्टेयर यानी 98.36 प्रतिशत है। उन्होंने सरकार से डेल्टा नहरों में कम से कम 10,000 क्यूसेक पानी छोड़ने को कहा है, जबकि अभी करीब 6,000 क्यूसेक मिल रहा है। कम पानी मिलने की वजह से उन्होंने कहा कि तेल के इंजनों का खर्च एक एकड़ पर 5,000 रुपये से ज्यादा बढ़ रहा है। एक एकड़ पर 5,000 रुपये से ज्यादा का खर्च उनका आरोप है, यह कोई सरकारी मुआवजा आंकड़ा नहीं है।

कृष्णा बेसिन के जलाशयों के आंकड़े: श्रीशैलम 875.69 फीट पर 82,000 क्यूसेक पानी आने के साथ; नागार्जुन सागर 532.9 फीट पर 52,000 क्यूसेक पानी आने के साथ; पुलिचिनतला 28.39 टीएमसी पर। किसान संगठन द्वारा कृष्णा-डेल्टा के किसानों को धान छोड़ने की सलाह को चुनौती देने की रिपोर्ट है, जो एक चुनौती है, सरकार का आदेश नहीं।

इस सोमवार की फाइलिंग पर कोई सूखा राहत सरकारी आदेश नहीं है। इस फाइलिंग पर न कोई फॉर्म बी है और न ही स्थानीय निकाय चुनाव की तारीख। जो पाठक विशेष पैकेज, फसल नुकसान सर्वेक्षण का नोटिस, या 10,000 क्यूसेक नहर पानी के आदेश की तलाश में हैं, उन्हें ये कागजात यहाँ नहीं मिलेंगे।

विजयवाड़ा से। कार्ड पर बताए गए बारिश पर निर्भर क्षेत्र अनंतपुर, श्री सत्य साई, कर्नूल, नंदायाल, वाई.एस.आर. कडप्पा और पलनाडु हैं। यह डेस्क मंडलवार कमी की तालिका या किसी दूसरे स्रोत से राष्ट्रीय तुलना नहीं बना रहा है।

सोमवार, 24 अगस्त 2026 की ईमानदार तस्वीर: बारिश की कमी 52.7 प्रतिशत जबकि राष्ट्रीय 13 प्रतिशत; खरीफ ₹18.9 लाख हेक्टेयर जबकि सामान्य ₹30.84 लाख, यानी 61 प्रतिशत; मूंगफली 34 प्रतिशत के साथ फसल की स्थिति; कृष्णा डेल्टा ₹1.21 लाख हेक्टेयर पर 10,000 क्यूसेक की मांग जबकि करीब 6,000 क्यूसेक; श्रीशैलम, नागार्जुन सागर और पुलिचिनतला के बेसिन स्तर; नागिरेड्डी का छह जिलों का तनाव मानचित्र जिसमें कर्नूल की वर्तनी सही है; सूखा पैकेज की किसान मांग; और कोई राहत सरकारी आदेश नहीं। जब तक पैकेज नहीं आता, जनता की फाइल यही कमी और मांग है।