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The Journalism of Outrage

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मंगलवार को नौ ठिकानों पर चली ईडी की तलाशी पूरी हुई, ₹3.6 करोड़ नकद जब्त हुआ। जीएसटी की किताबें अभी साबित नहीं हुई हैं।

मंगलवार को नौ ठिकानों पर चली ईडी की तलाशी पूरी हुई, ₹3.6 करोड़ नकद जब्त हुआ। जीएसटी की किताबें अभी साबित नहीं हुई हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत शुरू की गई तलाशी अभियान को समाप्त कर दिया। यह तलाशी सोमवार, 24 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद तथा हरियाणा के फरीदाबाद में नौ परिसरों पर शुरू हुई थी। इस अभियान के पूरा होने पर ₹3.6 करोड़ नकद और कुछ दस्तावेज जब्त किए गए हैं। सोमवार को शुरू हुए इसी नौ-ठिकानों के तलाशी अभियान की शुरुआत को पहले ही एक अन्य रिपोर्ट में प्रकाशित किया जा चुका है। यह पृष्ठ मंगलवार को अभियान के समाप्त होने की रिपोर्ट है, यह उस शुरुआत की पुनर्मुद्रण नहीं है।

यह जांच 'जंबुद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इम्पोर्ट्स' नामक फर्म से जुड़ी है। एजेंसी के अनुसार, इस फर्म ने माल की आवाजाही के बिना ही चालान और ई-वे बिल के जरिए फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) बनाया है। अधिकारियों ने इस सिलसिले में दो जीएसटी निष्कर्षों का जिक्र किया है: ₹9.63 करोड़ का फर्जी तरीके से लिया गया इनपुट टैक्स क्रेडिट, और ₹10.28 करोड़ का पास-ऑन इनपुट टैक्स क्रेडिट। ये दोनों रुपये के आंकड़े मंगलवार को डेस्क पर जीएसटी के निष्कर्षों के रूप में फिर से बताए गए हैं। ये कोई एक मिला-जुला गढ़ा हुआ कुल आंकड़ा नहीं है। यह डेस्क ₹9.63 करोड़ में ₹10.28 करोड़ जोड़कर कोई मिला-जुला धोखाधड़ी का आंकड़ा नहीं छापेगी, क्योंकि टिप में इसका कोई आधार नहीं है। ये एक खुली मनी लॉन्ड्रिंग फाइल में अभी तक साबित न हुए आरोप ही हैं। तलाशी पूरी होने का मतलब सजा या दोषसिद्धि नहीं है।

मंगलवार को जब्त किए गए ₹3.6 करोड़ नकद का आंकड़ा है। यह जीएसटी क्रेडिट का आंकड़ा नहीं है। तलाशी के अंत में जब्त किया गया नकद एक जांच संबंधी बरामदगी है। यह किसी अदालत द्वारा की गई जब्ती नहीं है और न ही यह कोई निष्कर्ष है कि कथित इनपुट टैक्स क्रेडिट फर्जी था। नकद के साथ लिए गए दस्तावेजों को भी जब्त बताया गया है। यह डेस्क दस्तावेजों के फोल्डर-वार ब्योरे, बैंक खाते के शेड्यूल या किसी लॉक-अप के बारे में कोई मनगढ़ंत जानकारी नहीं देगी, क्योंकि टिप में इसका जिक्र नहीं है।

शाह नवाज राणा का नाम इस जांच फाइल में दर्ज है। तथ्यों में उनका कोई पद, रिमांड या बयान दर्ज नहीं है। यह डेस्क कोई मनगढ़ंत जानकारी नहीं बनाएगी। तीन शहरों में फैले नौ परिसर ही इस जांच का भौगोलिक दायरा बने हुए हैं। मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद उत्तर प्रदेश में हैं, जबकि फरीदाबाद हरियाणा में है। इस मंगलवार की रिपोर्ट में किसी नए गिरफ्तारी का जिक्र नहीं है। किसी भी जब्ती आदेश का भी जिक्र नहीं है। ये चुप्पी अपनी जगह बरकरार हैं।

जब इनपुट टैक्स क्रेडिट धोखाधड़ी का आरोप लगता है, तो यह एक ऐसा आधार होता है जिसे मनी लॉन्ड्रिंग फाइल में तभी शामिल किया जा सकता है जब यह कहा जाए कि किसी निर्धारित अपराध ने आय उत्पन्न की है। जीएसटी की किताबें — ₹9.63 करोड़ लिए गए, ₹10.28 करोड़ पास-ऑन किए गए — ये आधार के आंकड़े हैं। मंगलवार को समाप्त हुई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम की तलाशी जांच का कदम है। चालान और ई-वे बिल को माल की आवाजाही न होने से जोड़ना इस मामले का सिद्धांत है। मामले का सिद्धांत होना ही अपराध साबित होना नहीं है।

इस फाइल में फॉर्म बी या किसी मतदान तिथि की सूचना नहीं दी गई है। जब तक एजेंसी का कोई और दस्तावेज नहीं आता और अदालत उसे नहीं परखती, तब तक सार्वजनिक रिकॉर्ड में यही है: मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में मंगलवार को पूरा हुआ नौ परिसरों का तलाशी अभियान, ₹3.6 करोड़ नकद और दस्तावेजों की जब्ती, एक फर्म — 'जंबुद्वीप एक्सपोर्ट्स एंड इम्पोर्ट्स' — पर माल की आवाजाही के बिना फर्जी चालान और ई-वे बिल का आरोप, ₹9.63 करोड़ के फर्जी तरीके से लिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट का आरोप, ₹10.28 करोड़ के पास-ऑन इनपुट टैक्स क्रेडिट का आरोप, और एक नाम, शाह नवाज राणा, जिसके पद के बारे में यह डेस्क कोई मनगढ़ंत जानकारी नहीं देगी। कथित क्रेडिट का एक-एक रुपया अभी भी साबित नहीं हुआ है। ₹3.6 करोड़ जब्ती का आंकड़ा है, कोई सजा या दोषसिद्धि नहीं।