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चुनाव

पश्चिम बंगाल SIR अपीलों का निपटान अब एक पाइपलाइन की तरह दिखाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से लंबित, तय, शामिल, बाहर, मंजूर और अपडेटेड मामलों का अलग-अलग ब्यौरा मांगा है।

पश्चिम बंगाल SIR अपीलों का निपटान अब एक पाइपलाइन की तरह दिखाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से लंबित, तय, शामिल, बाहर, मंजूर और अपडेटेड मामलों का अलग-अलग ब्यौरा मांगा है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को भारत चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित अपीलों का विस्तृत विवरण दाखिल करने का निर्देश दिया। मांगे गए विवरण में लंबित अपीलें, निपटाए गए मामले, नाम शामिल करना, नाम बाहर करना, मंजूर अपीलें और रोल अपडेट शामिल हैं। मंगलवार को अदालत ने मांग की कि इन मामलों को अलग-अलग हिस्सों में एक पाइपलाइन के रूप में देखा जाए। पीठ ने निपटान के एक ही कुल आंकड़े को पर्याप्त मानने से इनकार कर दिया। विस्तृत विवरण देने का निर्देश देने का मतलब यह नहीं है कि आयोग के ट्रिब्यूनल विफल रहे हैं, और न ही इसका मतलब यह है कि किसी का नाम गलत तरीके से हटाया गया था।

याचिकाकर्ताओं ने सूचना के अधिकार (RTI) के जवाब का हवाला देते हुए बताया कि लगभग 83,000 अपीलें तय की गई हैं और 75,443 नाम बहाल किए गए हैं। एक अन्य सुनवाई रिपोर्ट में निपटान का आंकड़ा लगभग 85,000 बताया गया है। ये दो अलग-अलग आंकड़े हैं। यह डेस्क लगभग 83,000 और 85,000 को मिलाकर कोई एक नया निपटान आंकड़ा नहीं बनाएगी। पचहत्तर हजार चार सौ तैंतालीस बहाल किए गए नाम याचिकाकर्ताओं द्वारा दिए गए RTI आंकड़ों में मौजूद हैं, लेकिन वे दूसरी सुनवाई रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं। अदालत ने खुद याचिकाकर्ताओं के आंकड़ों को सही नहीं ठहराया। मंगलवार को अदालत ने निपटान के लिए कोई अंतिम समय सीमा भी नहीं तय की।

पश्चिम बंगाल रोल का भौगोलिक क्षेत्र है और नई दिल्ली अदालत है। विशेष गहन पुनरीक्षण अपीलें ट्रिब्यूनल का काम हैं। नाम शामिल करना और बाहर करना दो विपरीत प्रक्रियाएं हैं। एक मंजूर अपील अपने आप रोल अपडेट नहीं बन जाती, जब तक कि वह अपडेट लिखित रूप में दर्ज न हो जाए। इसीलिए पीठ ने मंजूर मामलों और रोल अपडेट को अलग-अलग कॉलम में रखने को कहा है। यह रिपोर्ट मंजूर मामलों और अपडेटेड मामलों को एक ही कॉलम में मिलाकर नहीं देखेगी।

फॉर्म बी और किसी भी चुनाव की तारीख की अभी कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। विशेष गहन पुनरीक्षण अपील बुक एक रोल प्रक्रिया है, न कि कोई चुनाव अधिसूचना। यह रिपोर्ट पश्चिम बंगाल विधानसभा या लोकसभा की कोई तारीख, निर्वाचन क्षेत्र-वार तालिका, या अदालत द्वारा प्रमाणित 83,000 या 85,000 का कोई आंकड़ा खुद से नहीं बनाएगी।

लगभग 83,000 तय किए गए मामले याचिकाकर्ताओं के RTI जवाब से जुड़े आंकड़े हैं। लगभग 85,000 निपटाए गए मामले सुनवाई रिपोर्ट का अनुमान है। इन दोनों रिपोर्टों के बीच लगभग 2,000 का अंतर है, इसीलिए इस रिपोर्ट ने उन्हें अलग-अलग रखा है। 75,443 बहाल किए गए नाम एक तीसरा आंकड़ा है, और यह केवल RTI आंकड़ों के साथ ही जुड़ा है। यह रिपोर्ट किसी भी निपटान कुल आंकड़े में से 75,443 को घटाकर कोई नया 'अभी बाकी' आंकड़ा नहीं छापेगी। भारत चुनाव आयोग से अपने स्वयं के अलग कॉलम मांगे गए हैं, जो मंगलवार के रिकॉर्ड पर अभी मौजूद नहीं हैं।

जब तक भारत चुनाव आयोग यह विस्तृत विवरण दाखिल नहीं करता, तब तक सार्वजनिक रिकॉर्ड में केवल मंगलवार का वह निर्देश है जिसमें लंबित, निपटाए गए, शामिल, बाहर किए गए, मंजूर और रोल-अपडेट कॉलम की मांग की गई है। इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं के RTI आंकड़ों के अनुसार लगभग 83,000 अपीलें तय हुई हैं और 75,443 नाम बहाल हुए हैं, और 85,000 निपटान का एक अलग सुनवाई रिपोर्ट का आंकड़ा है। अदालत ने इन दोनों में से किसी भी आंकड़े को सही नहीं ठहराया है, कोई अंतिम निपटान समय सीमा तय नहीं की गई है, और यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष है। निपटान के दोनों आंकड़े दो ही हैं और यह रोल अभी कोई अधिसूचित चुनाव नहीं है।