ईडी ने 11 अगस्त को गिरफ्तार किया था। गुरुवार को उनके आवास पर छापेमारी की गई।

वह पहले से ही आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के विचाराधीन कैदी थे जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें 11 अगस्त को गिरफ्तार किया। उसी एजेंसी ने गुरुवार को उनके आवास पर छापेमारी की।
गुरुवार को निदेशालय ने धमतरी के औद्योगीक वार्ड में कांग्रेस नेता और पूर्व छत्तीसगढ़ कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के आवास पर छापेमारी की। रायपुर में भी आगे छापेमारी की सूचना मिली। ये छापेमारी शराब घोटाले के एक कथित मामले में की गई हैं। ये छापेमारी हैं, दोषसिद्धि नहीं। इन रिपोर्टों के समय तक निदेशालय ने विस्तृत जब्ती का कोई विवरण जारी नहीं किया था। यह डेस्क नकद राशि, लॉकर या दस्तावेजों की सूची का आविष्कार नहीं करेगा जो एजेंसी ने जारी नहीं की है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। धमतरी विधायक ओमकार साहू उनमें शामिल थे। छापेमारी पर विरोध प्रदर्शन एक राजनीतिक तथ्य है। यह कानूनी बचाव नहीं है और न ही निर्दोषता का निष्कर्ष है।
अग्रवाल की 11 अगस्त की गिरफ्तारी तब हुई जब वह पहले से ही EOW के विचाराधीन कैदी थे। दो एजेंसियां, दो मामले, एक व्यक्ति। शराब घोटाले का मामला वह फाइल है जिसे ED ने नाम दिया है। रिपोर्ट की गई छापेमारी शराब घोटाले की छापेमारी है।
राज्य कांग्रेस प्रमुख दीपक बैज ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग विपक्षी नेताओं को डराने के लिए किया जा रहा है। उनके शब्द, जिन्हें यहाँ सुरक्षित रखा गया है, ये हैं: ED और CBI की कार्रवाई छत्तीसगढ़ में अब कोई नई बात नहीं है। ED, CBI, आयकर और अन्य एजेंसियों ने इसे विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और डराने की एक दिनचर्या बना लिया है। यह पार्टी अध्यक्ष का आरोप है। यह अदालत का निष्कर्ष नहीं है। यह डेस्क इसे उनके आरोप के रूप में छापेगा।
शराब के वर्षों पर एजेंसी का मामला गुरुवार से पुराना है। ED ने 2019-2022 के शराब सिंडिकेट का आरोप लगाया है, जो तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के तहत था जिसने
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