चार साल बाद PMLA पर ED की ताकत की समीक्षा को बेंच मिली। 2022 के फैसले को पलटने की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपनी ही 2022 की विजय मदनलाल चौधरी फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। वह फैसला मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी, संपत्ति कुर्क करने और तलाशी-जब्ती की शक्तियों को बरकरार रखता था। सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करना कानून को रद्द करना नहीं है। 2022 का फैसला अभी भी प्रभावी है।
बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहाना शामिल हैं। कपिल सिब्बल ने कार्ति चिदंबरम की ओर से पेश होते हुए कहा कि अगस्त 2022 में नोटिस जारी किए गए थे और अब याचिकाओं को सुनवाई की जरूरत है। समीक्षा के लिए चार साल का इंतजार लंबा समय है। यह अपने आप में फैसले को पलटना नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सूचीबद्ध करना बेंच आवंटन पर सहमति दर्ज करने के लिए है। फाइल को मूल संयोजन में वापस भेजने से तीन बैंच टूट जाएंगी। तात्कालिकता को देखते हुए, यह बेंच मामले की सुनवाई करेगी। अगली तारीख बाद में तय होगी। तात्कालिकता का मतलब यह नहीं है कि परिणाम क्या होगा।
पिछले साल 31 जुलाई को अदालत ने कहा था कि वह पहले यह सुनेगी कि याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं या नहीं। समीक्षा की गुंजाइश सीमित होती है। निदेशालय ने तीन प्रारंभिक मुद्दे उठाए हैं। समीक्षा याचिकाओं ने 13 सवाल उठाए हैं। 13 सवालों के खिलाफ तीन मुद्दे: पहला मुकाबला यह है कि गुंजाइश कितनी बड़ी है। यह डेस्क उन 13 सवालों या तीन मुद्दों के पाठ का आविष्कार नहीं करेगी, क्योंकि कार्ड में वे नहीं दिए गए हैं।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को याद दिलाया कि 2022 की बेंच ने केवल दो बिंदुओं पर नोटिस जारी किया था - अभियुक्त को प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) की आपूर्ति और PMLA की धारा 24 के तहत विपरीत बोझ। दो बिंदुओं पर नोटिस पूरे कानून पर नोटिस नहीं है। यदि वह 2022 का ढांचा कायम रहता है, तो समीक्षा पहले से ही 13 सवालों से संकरी है।
2022 का फैसला, जैसा कि 20 अगस्त को दोहराया गया था, अभी भी लागू वास्तुकला है। मनी लॉन्ड्रिंग एक
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