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कुरनूल के कोसगी में दो एकड़ जमीन का मामला, 2006 की खरीद और पिछले साल की ऑनलाइन जांच में दो नाम। 1 जून की सिफारिश, एक साल बाद भी फाइल बंद नहीं।

कुरनूल के कोसगी में दो एकड़ जमीन का मामला, 2006 की खरीद और पिछले साल की ऑनलाइन जांच में दो नाम। 1 जून की सिफारिश, एक साल बाद भी फाइल बंद नहीं।

रिटायर्ड डीएसपी भास्कर नायडू ने 2006 में कुरनूल जिले के कोसगी मंडल के कंदुकुर गांव में सर्वे नंबर 312 की दो एकड़ जमीन खरीदी थी। पिछले साल एक ऑनलाइन जांच में यही जमीन दो अन्य नामों पर मिली। यह फाइल की शुरुआत है, राजस्व कार्रवाई का अंत नहीं।

भास्कर ने कोसगी पुलिस में शिकायत की। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखा। इसके बाद कोसगी पुलिस ने मुरालमोहन रेड्डी और गंगाधर स्वामी के खिलाफ केस दर्ज किया। डीजीपी को पत्र के बाद दर्ज केस एक पुलिस केस है, दोषसिद्धि नहीं। यह डेस्क उन एफआईआर सेक्शनों को नहीं लिखेगा जो कार्ड पर नहीं हैं।

इसके बाद दोनों ने उसी जमीन को गिरवी रखकर अलग-अलग बैंकों से ₹62 लाख रुपये का कर्ज लिया। 'अलग' शब्द महत्वपूर्ण है। किसी बैंक का नाम नहीं लिया गया है। यह डेस्क किसी बैंक का नाम गढ़कर कैप्शन नहीं भरेगा। जब कर्ज का पता चला, तो भास्कर ने दोबारा शिकायत की। दूसरी शिकायत दूसरी कागजी कार्रवाई है, अदालती आदेश नहीं।

अदोनी के उप-संग्राहक और कोसगी के तहसीलदार ने जांच की। 1 जून पिछले साल उन्होंने दोनों की पासबुक से दो एकड़ जमीन हटाने की सिफारिश की। एक साल बाद भी कुछ नहीं हुआ। 'अनुशंसित' शब्द है, 'हटाया गया' नहीं। एक साल का विलंब है। यह डेस्क उस सिफारिश को प्रविष्टि में नहीं बदलेगा जो लिखी नहीं गई है।

भास्कर ने सर्वे नंबर 312 को विवाद रजिस्टर में दर्ज करने की मांग की। गांव राजस्व अधिकारी और राजस्व निरीक्षक को जांच के लिए कहा गया, न कि राजस्व संभाग अधिकारी को खुद जांच करने के लिए। विवाद रजिस्टर की अर्जी पर उन्हें एक बार भी नहीं बुलाया गया। 'कभी नहीं बुलाया गया' उनका बयान है। यह सार्वजनिक कार्ड पर प्रक्रिया की शिकायत के रूप में है, न कि इस निष्कर्ष के रूप में कि रजिस्टर में प्रविष्टि हो चुकी है।

फाइलिंग 21 अगस्त 2026, 06:03 IST, कोसगी, कुरनूल जिला। जमीन हड़पने और विलंबित राजस्व कार्रवाई की रिपोर्ट। दोषसिद्धि नहीं। अदालती आदेश नहीं। नामित बैंक नहीं। दो एकड़, 2006 की खरीद, पिछले साल की ऑनलाइन जांच, डीजीपी पत्र, दो बुक किए गए व्यक्ति, विधायक का रिश्ता जैसा बताया गया, ₹62 लाख का गिरवी कर्ज, 1 जून की सिफारिश, एक साल की निष्क्रियता, विवाद रजिस्टर की अर्जी, वीआरओ और आरआई जांच न होकर आरडीओ की जांच—यह सार्वजनिक फाइल का पूरा हिस्सा है।

यह डेस्क भारतीय दंड संहिता का एक सेक्शन, बैंक की शाखा या न्यायाधीश का पैराग्राफ नहीं जोड़ेगा। ये अतिरिक्त चीजें यहाँ नहीं हैं। एक रिटायर्ड डीएसपी 2006 में जमीन खरीद सकता है और 2026 में भी उस प्रविष्टि के लिए पूछ रहा है जिसकी सिफारिश एक साल पहले की गई थी। पुलिस बुकिंग में 'साला-जीजा' का रिश्ता एक रिश्ते का विवरण है, विधायक के खिलाफ निष्कर्ष नहीं। बालनागी रेड्डी का नाम केवल रिश्तेदार के रूप में कार्ड पर है। यह डेस्क उन्हें वहीं रखेगा।

कोसगी पुलिस ने डीजीपी को पत्र लिखे जाने के बाद कार्रवाई की। राजस्व ने नाम हटाने की सिफारिश की और फिर रुक गया। विवाद रजिस्टर वह कागजी कार्रवाई है जिसकी भास्कर ने मांग की थी और इन तथ्यों में उसे खुद जांच के लिए नहीं बुलाया गया। दो एकड़। सर्वे 312। कंदुकुर। ₹62 लाख रुपये। पिछले साल 1 जून। एक साल की निष्क्रियता।

जब तक पासबुक वास्तव में सुधारी नहीं जाती, ऑनलाइन नाम और गिरवी कर्ज उसी जमीन पर रहेंगे। जब तक अदालत नहीं लिखती, बुकिंग बुकिंग ही रहेगी। ईमानदार तस्वीर 2006 की बिक्री, पिछले साल का ऑनलाइन झटका, विलंबित पुलिस केस, विवादित जमीन पर बैंक कर्ज और राजस्व सिफारिश है जिसे उम्र बढ़ने दी गई है।