कुरनूल में किशोर गर्भावस्था दर 13.60 प्रतिशत है, जो राज्य के औसत 8.8 प्रतिशत से काफी अधिक है। यह आंकड़ा राज्य में दूसरे स्थान पर है।

कुरनूल जिले में किशोर गर्भावस्था की दर 13.60 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि राज्य का आंकड़ा 8.8 प्रतिशत है। यह जिला इस मामले में राज्य में दूसरे स्थान पर है। ये आंकड़े इस रिपोर्ट का मुख्य आधार हैं, जिसमें किसी भी नाबालिग या किशोर माँ का नाम उजागर नहीं किया गया है।
जिले में प्रतिवर्ष 45,000 से 48,000 प्रसव होते हैं, जिनमें से 13 से 14 प्रतिशत किशोर लड़कियों के होते हैं। अप्रैल से 4 अगस्त के बीच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (UPHCs) में 16,856 गर्भवती महिलाओं ने पंजीकरण कराया। इनमें से 2,178 का पंजीकरण 18 वर्ष से कम आयु वाली लड़कियों का था। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पंजीकरण केवल एक क्लिनिक नंबर है, किसी व्यक्ति की पहचान नहीं।
पतिकोंडा, अडोनी, मंतरालयम, आलुर, येम्मिगनूर और कोडुमर जैसे क्षेत्रों में किशोर गर्भावस्था की दर 15 से 24 प्रतिशत के बीच है। येम्मिगनूर की वर्तनी येम्मिगनूर ही रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिवर्ष होने वाली मातृ मृत्यु में लगभग 5 प्रतिशत की हिस्सेदारी किशोरियों की होती है। उच्च जोखिम वाली गर्भधारण की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहाँ 30 प्रतिशत मामले किशोरियों के होते हैं, जैसा कि कुरनूल सरकारी अस्पताल के स्त्री रोग विभाग की प्रमुख डॉ. स्निग्धा ने बताया है। इन मामलों में हीमोग्लोबिन का स्तर आमतौर पर 8 से 9 के बीच होता है, जिससे सिजेरियन की दर अधिक होती है और भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
तेर्नकल्लू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन महीनों में 210 पंजीकरण हुए, जिनमें से 52 किशोरियों के थे, जो इस रिपोर्ट में सबसे अधिक 24.8 प्रतिशत है। दैवंदिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 271 पंजीकरण हुए, जिनमें 64 किशोरियां (23.6 प्रतिशत) शामिल थीं। पोलकलु, कृष्णगिरि, येम्मिगनूर और गोवर्धनगिरि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में यह दर लगभग 20 प्रतिशत के आसपास है। मई में दो किशोर माताओं की मृत्यु प्रसव के बाद हुई—एक निजी अस्पताल में और एक सरकारी अस्पताल में। रिपोर्ट में मृत्यु का मुख्य कारण बाल विवाह बताया गया है। इन मौतों से संबंधित कोई नाम, गाँव या परिवार की जानकारी इस रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
मुख्यमंत्री ने छह महीने पहले जिला कलेक्टरों को क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया था। एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) द्वारा पिछले दस वर्षों में 720 जागरूकता बैठकें और 47 प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए हैं, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, ये बैठकें ग्रामीण माता-पिता तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुँच पाई हैं। जिन बैठकों का प्रभाव जमीनी स्तर पर नहीं दिखता, वे केवल एक संख्या मात्र हैं, न कि कोई सफल अभियान।
बाल विवाह के हॉटस्पॉट के रूप में होलगुंड, हलाहरवी, कोवथलम, कोसिगी, मंतरालयम, येम्मिगनूर, आलुर, असपरी, सी. बेलागल, चिप्पगिरी, आत्मकुरु, वेल्लगोडु, चागलमर्री, कोलीमिगुंडला, सिरिवेल्ला, रुद्रवरम और अल्लागड्डा जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। यह जोखिम का एक भौगोलिक मानचित्र है, न कि अभियोजन की सूची। इस रिपोर्ट में किसी नए सरकारी आदेश या दर्ज मामलों की संख्या का उल्लेख नहीं किया गया है।
अंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, महिला पुलिस और सहायक नर्स-मिडवाइफ की ग्राम और मंडल स्तरीय समितियों का गठन कागजों पर मौजूद है। कागजों पर बनी समिति का अर्थ यह नहीं है कि वह बाल विवाह रोकने में सक्रिय है। यह रिपोर्ट कागजी समितियों को सक्रिय मानकर उनका श्रेय नहीं देती है।
यह रिपोर्ट 20 अगस्त 2026 को 04:01 IST पर दाखिल की गई थी। इस रिपोर्ट का उद्देश्य केवल तथ्यात्मक आंकड़े प्रस्तुत करना है: 13.60 बनाम 8.8, 16,856 में से 2,178 कम उम्र के पंजीकरण, 15-24 प्रतिशत वाले क्षेत्र, डॉ. स्निग्धा का 30 प्रतिशत उच्च जोखिम वाला आंकड़ा, 8-9 हीमोग्लोबिन स्तर, तेर्नकल्लू का 24.8 प्रतिशत और दैवंदिन का 23.6 प्रतिशत, लगभग 20 प्रतिशत वाले चार केंद्र, बाल विवाह से जुड़ी दो अनाम मौतों, 720 बैठकें और 47 शिविर जो ग्रामीण माता-पिता तक नहीं पहुँचे, और हॉटस्पॉट की सूची।
राज्य में दूसरे स्थान पर रहने वाली यह दर किसी निजी दुख का विषय नहीं, बल्कि एक जिला स्तर का आंकड़ा है। इस आंकड़े के भीतर छिपे बच्चों के नाम इस रिपोर्ट में उजागर नहीं किए गए हैं। वह कार्य, जिसे उनके माता-पिता तक पहुँचना चाहिए था, इस फाइल में अभी तक उन तक नहीं पहुँचा है।
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