Praja Hakku

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खेल

बिचु देवी के आखिरी बचाव ने इंग्लैंड को गोलरहित रोका, पूल D का दूसरा टिकट भारत के नाम।

एम्सटवेन के वैगनर स्टेडियम में गुरुवार को इंग्लैंड के खिलाफ 0-0 की हार ने भारत को महिला हॉकी विश्व कप के दूसरे दौर में पहुँचा दिया। यह मुकाबला 20 अगस्त 2026 को खेला गया था। यह पुरुषों का मैच नहीं है, जो पाकिस्तान के खिलाफ 5-3 रहा था। यह महिलाओं का मैच था। स्कोर 0-0 रहा। भारत पूल D में दूसरे स्थान पर रहा और चीन के पीछे दूसरे दौर में पहुँच गया। कप्तान सलमा टेटे की टीम ने गोल नहीं किया। इंग्लैंड ने भी गोल नहीं किया। विश्व कप पूल में गोलरहित ड्रॉ एक परिणाम है, विफलता नहीं, जब दूसरा स्थान ही टिकट हो। भारत ने वह टिकट ले लिया। चीन ने पूल में पहला स्थान लिया। इस डेस्क के पास चीन का स्कोरलाइन या अंकों की तालिका का विवरण नहीं है, और न ही इसे गढ़ा जाएगा। दोपहर का खेल रक्षात्मक रहा, खासकर दूसरे हाफ में इंग्लैंड के पेनल्टी कॉर्नर के खिलाफ। पेनल्टी कॉर्नर से 0-0 का ड्रॉ टूटता है। इंग्लैंड के पास पेनल्टी कॉर्नर थे। भारत ने उन्हें झेल लिया। आखिरी बचाव बिचु देवी ने टेसा हॉवर्ड पर किया। 0-0 के मैच में गोलकीपर का आखिरी हस्तक्षेप ही एकमात्र नाम रह जाता है। यह दूसरे दौर के टिकट और पूल के बीच का अंतर है। सलमा टेटे इस मैच की कप्तान थीं। गोलरहित ड्रॉ की कप्तान से हैट्रिक का उद्धरण नहीं माँगा जाता। उनसे एक ऐसी संरचना बनाए रखने को कहा जाता है जो लीक न हो। संरचना टिकी रही। यही गुरुवार को एम्सटवेन से महिलाओं की खबर है। वैगनर में हॉकी विश्व कप उन पाठकों को भ्रमित कर सकता है जिन्होंने एक ही सप्ताह में पुरुषों और महिलाओं को एक ही स्टेडियम में देखा। पुरुषों का पाकिस्तान के खिलाफ परिणाम एक अलग कार्ड है, जो पहले से लाइव है। महिलाओं का कार्ड इंग्लैंड, 0-0, चीन के पीछे दूसरा, गोलकीपर बिचु देवी, कप्तान टेटे, दूसरे हाफ में पेनल्टी-कॉर्नर रक्षा, दूसरा दौर है। 0-0 को लिखना आसान है। यह वह मैच है जिसे पसंदीदा टीम निचोड़ती है और जिसे कमज़ोर टीम चुराती है। हाफ-टाइम के बाद इंग्लैंड पेनल्टी कॉर्नर पर थी, जो निचोड़ रही थी। भारत वह टीम थी जिसने गोल नहीं दिया। हॉवर्ड आखिरी खतरा था। बिचु देवी वह कारण थीं कि खतरा बाहर रहा। दूसरा दौर योग्यता है, पदक नहीं। पूल D का क्रम चीन, फिर भारत है। उसके बाद की हर चीज़ बाद का कटिंग है। गुरुवार का काम एम्सटवेन से एक अंक, एक क्लीन शीट और अगले दौर में जगह लेकर निकलना था। महिलाओं ने बिना गोल किए वह काम किया। उन्होंने कॉर्नर का बचाव करके और एक आखिरी बचाव के नाम से वह किया। इस डेस्क के पास शूटर-दर-शूटर कॉर्नर काउंट, कब्जे का आंकड़ा या टेटे या बिचु देवी का उद्धरण नहीं है। इसे गढ़ा नहीं जाएगा। 0-0 की ईमानदार लंबाई वह अनुशासन है जो इसमें लगा। इंग्लैंड के खिलाफ, विश्व कप पूल में, दूसरे दौर के दरवाजे खुले होने पर, वह अनुशासन ही मैच था। जब तक दूसरा दौर शुरू नहीं होता, भारत की महिला विश्व कप एक ड्रॉ, एक क्लीन शीट, एक गोलकीपर का नाम, एक कप्तान का नाम और चीन के पीछे पूल की स्थिति है। पुरुषों का अपना स्कोर इस स्टेडियम से है। यह फाइल महिलाओं की है, और महिलाएँ आगे बढ़ गई हैं।