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The Journalism of Outrage

जाँच

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए 'उन्नति' योजना के तहत करीब ₹60 लाख के ऋण में अनियमितता के आरोप लगे हैं। यह मामला कुरनूल जिले का है, जहाँ ऑडिट में गड़बड़ी पाई गई है।

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए 'उन्नति' योजना के तहत करीब ₹60 लाख के ऋण में अनियमितता के आरोप लगे हैं। यह मामला कुरनूल जिले का है, जहाँ ऑडिट में गड़बड़ी पाई गई है।

उन्नति योजना अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए ब्याज मुक्त आजीविका ऋण के रूप में शुरू की गई थी। इस योजना के तहत ₹50,000 से ₹3 लाख तक का ऋण दिया जाता है। कुरनूल कलेक्टर कार्यालय में चल रहे ऑडिट में यह जांच की जा रही है कि ऋण लेने वालों के नाम पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किया गया है, न कि किसी अदालत में किसी को दोषी ठहराया गया है।

कुछ स्वयं सहायता समूह की नेताओं और जिला ग्रामीण विकास एजेंसी-वेल्लगु के कर्मचारियों पर आरोप है कि उन्होंने गरीब महिलाओं के नाम पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाए। बुक-कीपर्स, क्लस्टर कोऑर्डिनेटर्स और असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर्स पर 3 प्रतिशत कमीशन लेने और फिर उस राशि को आपस में बांटने का आरोप है। इस रिपोर्ट में किसी गांव या आरोपी का नाम नहीं दिया गया है।

2014-15 से 2024-25 के बीच कुरनूल जिले में करीब ₹60 लाख के ऋण के दुरुपयोग का आरोप है। अब तक ₹10 लाख से भी कम की वसूली हुई है। यह रिपोर्ट 'करीब' और '₹10 लाख से भी कम' जैसे शब्दों का उपयोग करती है। एक दशक में ₹60 लाख का दुरुपयोग और ₹10 लाख से कम की वसूली इस मामले के मुख्य आंकड़े हैं।

रिपोर्ट में यह भी आरोप है कि वेल्लगु के कुछ कर्मचारियों ने स्वयं लाभार्थियों के नाम पर ऋण ले लिए। इसके अलावा, यह आरोप भी है कि स्थानीय नेताओं ने अपने परिवार की महिलाओं के नाम पर ब्याज मुक्त ऋण लिए और डीआरडीए अधिकारियों पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र स्वीकार करने का दबाव बनाया गया। इस रिपोर्ट में किसी नेता या अधिकारी का नाम नहीं है और न ही किसी अदालत ने किसी को दोषी ठहराया है।

2026-27 में इस योजना के प्रति सरकार की प्रतिक्रिया के रूप में नई शर्तें लागू की गई हैं। अब जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। 'सोसाइटी फॉर एलिमिनेशन ऑफ रूरल पॉवर्टी' ने ऋण देने से पहले और बाद में बायोमेट्रिक सत्यापन की मांग की है। ब्याज मुक्त लाभ बनाए रखने के लिए मासिक किस्तें जमा करना अनिवार्य होगा। अब प्राथमिकता एकल महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों को दी जाएगी। ऋण लेने वाले की आयु 60 वर्ष से कम होनी चाहिए और वह किसी अन्य योजना से पहले ऋण न ले रहा हो। ये नए नियम हैं, न कि कोई सरकारी आदेश जो किसी पर मुकदमा चला रहा हो। इस रिपोर्ट में कोई नया सरकारी आदेश (जीओ) नंबर नहीं है।

उन्नति योजना अभी भी आजीविका का एक साधन है और ऋण की राशि ₹50,000 से ₹3 लाख ही है। ऑडिट ने सार्वजनिक रूप से एक दशक, एक जिला, करीब ₹60 लाख के दुरुपयोग का आरोप, ₹10 लाख से कम की वसूली, 3 प्रतिशत कमीशन का आरोप, कर्मचारियों द्वारा लाभार्थियों के नाम पर ऋण लेने का आरोप और बिना नाम के राजनीतिक दबाव का आरोप सामने रखा है।

जो पाठक गांवों की सूची चाहते हैं, उन्हें उसके लिए इंतजार करना होगा। जो पाठक किसी दोषी का नाम चाहते हैं, उन्हें अदालत के फैसले का इंतजार करना होगा। 21 अगस्त की इस रिपोर्ट का काम केवल योजना, रुपये की राशि, दशक, दो रुपये के आंकड़े, 3 प्रतिशत कमीशन और 2026-27 के बायोमेट्रिक और किस्त के नियमों को बताना है और बाकी बातों को नकारना है।

ये ऑडिट के आरोप हैं। जब तक अदालत कुछ और न कहे, ये आरोप ही रहेंगे। यह योजना जिस महिला के लिए बनाई गई थी, वही इसके लिए पात्र है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रमाण पत्र हमेशा उन्हीं के नाम पर नहीं थे।