राजंपेट थाना के SI ने ₹30,000 की रिश्वत ली। ACB ने उसी नकदी के साथ उन्हें रंगेहाथ पकड़ा।

कमारेड्डी जिले के राजंपेट थाना के एक सब-इंस्पेक्टर को रिश्वत के मामले में ACB ने हिरासत में लिया है। ACB का कहना है कि उन्होंने पैसों के लेन-देन को अपनी आंखों से देखा है। यह राशि ₹30,000 है। घटना गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को हुई। इनमें से कोई भी बात अभी तक कानूनी रूप से सिद्ध नहीं हुई है।
आरोपी अधिकारी दुव्वला अंजनेयुलु हैं, जो कमारेड्डी जिले के राजंपेट थाना में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। उन पर छापेमारी करने वाली ACB टीम का नेतृत्व निजामबाद ACB के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस शेखगौड ने किया था। छापेमारी कमारेड्डी शहर के NGOs कॉलोनी स्थित उनके आवास पर हुई। ये चार विवरण—नाम, थाना, टीम और कॉलोनी—आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं।
जैसा कि आधिकारिक जानकारी में बताया गया है, मांग के दो हिस्से थे। शिकायतकर्ता के बेटे की स्टेशन बेल कराने के लिए ₹30,000। और उसी मांग में, चार्जशीट में ऐसी धाराएं जोड़ने के लिए ₹30,000 जो सजा को कम कर सकें। एक ही नकदी की राशि, दो अलग-अलग सेवाएं। स्टेशन बेल पुलिस स्टेशन से रिहाई है, अदालत से नहीं। चार्जशीट की धाराएं वे कानूनी लेबल हैं जो तय करती हैं कि मजिस्ट्रेट के सामने केस कितना गंभीर दिखेगा। SI पर आरोप है कि उन्होंने इन दोनों चीजों को आसान बनाने के लिए पैसे मांगे थे।
शिकायतकर्ता ने इस मांग की जानकारी ACB को दी। अधिकारियों ने SI को तब रंगेहाथ पकड़ लिया जब उन्हें रिश्वत दी जा रही थी। 'रंगेहाथ' शब्द का इस्तेमाल ACB उस कार्रवाई के लिए करता है जिसमें नकदी का लेन-देन देखा गया हो। यह अदालत का शब्द नहीं है जो अपराध सिद्ध करे। इस कार्रवाई में पकड़ी गई नकदी वही ₹30,000 है जिसका जिक्र मांग में किया गया था। इस डेस्क ने किसी खास नोट की संख्या, दराज या दूसरे लिफाफे का जिक्र नहीं किया है क्योंकि आधिकारिक जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है।
अंजनेयुलु को हिरासत में लिया गया है। उन्हें हैदराबाद के नंपल्ली स्थित ACB कोर्ट के जज के सामने पेश किया जाएगा। पेश करना अगला कदम है। इस पेशी के समय के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, और इस डेस्क ने कोई समय नहीं गढ़ा है। शिकायतकर्ता का विवरण गोपनीय रखा जाएगा। मामला अभी जांच के अधीन है।
आधिकारिक जानकारी में जो बातें नहीं हैं, वे हैं बेटे का मूल अपराध, चार्जशीट में पहले से मौजूद धाराएं, जो धाराएं जोड़ी जानी थीं, या SI का कोई बयान। ये कमियां ही एक साधारण मामले को बड़ी कहानी का रूप दे देती हैं। इस डेस्क ने कोई बड़ी कहानी नहीं लिखी है।
स्टेशन बेल की मांग एक खास तरह का आरोप है। यह कहता है कि पुलिस स्टेशन ने आज़ादी को एक कीमत वाली सेवा की तरह बेचा। चार्जशीट में बदलाव की मांग दूसरा आरोप है। यह कहता है कि उसी स्टेशन ने कानून को एक मेनू की तरह इस्तेमाल किया। ये दोनों बातें ACB का पक्ष हैं, इस अखबार का फैसला नहीं।
राजंपेट कमारेड्डी जिले का एक थाना है। NGOs कॉलोनी कमारेड्डी शहर का एक रिहायशी इलाका है। छापेमारी घर पर हुई, थाना पर नहीं। घर पर हुई कार्रवाई और थाना पर हुए अपराध की जगह एक नहीं होती। आरोप पुलिस स्टेशन की शक्तियों को बेचने का है। आरोप है कि नकदी घर पर दी गई।
निजामबाद के ACB DSP का कमारेड्डी में छापेमारी करना एक आम बात है। ACB का काम सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है। नंपल्ली वह जगह है जहाँ तेलंगाना की ACB कोर्ट बैठती है। इसीलिए अगली पेशी हैदराबाद में होगी, कमारेड्डी में नहीं।
यह एक ACB कार्रवाई है, जैसा रिपोर्ट किया गया है, कोई कानूनी फैसला नहीं। जब तक नंपल्ली कोर्ट का फैसला नहीं आता, ₹30,000 एक कथित कीमत है, अंजनेयुलु एक आरोपी अधिकारी हैं, और शिकायतकर्ता का बेटा वह व्यक्ति है जिसका नाम इस डेस्क के पास नहीं है और न ही वह उसे ढूंढ रहा है। सार्वजनिक जानकारी काफी है: एक मांग, एक कार्रवाई, NGOs कॉलोनी में एक घर, शेखगौड नाम के DSP, हिरासत और नंपल्ली की अदालत।
गुरुवार की खबर यह है कि एक पुलिस स्टेशन की बेल की खिड़की को ACB के मुताबिक ₹30,000 के काउंटर पर रख दिया गया था। ब्यूरो का कहना है कि उसने उसी नकदी के साथ उस काउंटर को बंद कर दिया। नंपल्ली के जज से यह तय करने को कहा जाएगा कि उस नकदी का क्या मतलब है।
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